Nu se pretează? Nu contează! La noi puteți returna bunurile în 30 de zile
Cu un voucher cadou nu veți da greș. În schimbul voucherului, destinatarul își poate alege orice din oferta noastră.
30 de zile pentru retur bunuri
''आँसू के द्वारे कटी सुबह, दुख के घर बीती दुपहरी। अब जाने डोला कहाँ रूके, अब जाने शाम कहाँ पर हो।।'' सच ही है श्री गोपालदास सक्सेना की अनुभूतियों के अभिव्यक्तिकरण का नाम है- 'नीरज'। नीरज जहाँ एक छन्द हैं, एक गीत हैं, एक श्लोक हैं वहीं 'गोपाल' एक दर्द हैं, एक अभाव हैं जिसने जन्म से लेकर आज तक सिर्फ सहन किया। कभी भाग्य के द्वारा, कभी प्रेम के द्वारा और कभी लोकप्रियता के द्वारा। लोगों में प्यार लुटाते व खुशियाँ बाँटते इस शख्स की मुस्कुराहट में छिपा था वो सिसकता आँसू जिसको कभी किसी ने आँखों से छलकते नहीं देखा पर उसका यही दर्द और खामोश सिसकी बनी कभी न खत्म होने वाली कविता।
Bună ziua! Sunt Libroamiko, consilierul dumneavoastră de cărți.
Cu ce vă pot ajuta?